धर्म

आज का हिन्दू पंचांग 17 नवम्बर: आज करें विष्णु पूजा, जानें समय और राहुकाल

आज का हिन्दू पंचांग 17 नवम्बर: राहुकाल और शुभमुहूर्त के साथ जानें कैसे लगेगा कार्यस्थल पर मन और उन्नतिकारक कुंजियाँ

दिनांक – 17 नवम्बर 2022
दिन – गुरुवार
विक्रम संवत् – 2079
शक संवत् – 1944
अयन – दक्षिणायन
ऋतु – हेमंत
मास – मार्गशीर्ष ( गुजरात एवं महाराष्ट्र में कार्तिक मास )
पक्ष – कृष्ण
तिथि – अष्टमी सुबह 07:57 तक तत्पश्चात नवमी
नक्षत्र – मघा रात्रि 09:21 तक तत्पश्चात पूर्वाफाल्गुनी
योग – इन्द्र रात्रि 01:24 तक तत्पश्चात वैधृति
राहु काल – दोपहर 01:47 से 03:10 तक
सूर्योदय – 06:54
सूर्यास्त – 05:55
दिशा शूल – दक्षिण दिशा में
ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 05:10 से 06:02 तक
निशिता मुहूर्त – रात्रि 11:59 से 12:51 तक
व्रत पर्व विवरण
विशेष – अष्टमी को नारियल का फल खाने से बुद्धि का नाश होता है । नवमी को लौकी खाना त्याज्य है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड : 27.29-34)

दरिद्रता दूर, रोजी-रोटी में बरकत भरपूर

दरिद्रता भगानी हो तो व्यर्थ खर्च न करो । ब्याज पर कर्ज ले के गाड़ियाँ न खरीदो एवं मकान न बनाओ । आवक बढ़ानी हो अथवा बरकत लानी हो तो मंत्र है : ‘ॐ अच्युताय नमः’ जिसका पद कभी च्युत नहीं होता… इन्द्रपद भी च्युत हो जाता है, ब्रह्माजी का पद भी च्युत हो जाता है फिर भी जो च्युत नहीं होते अपने स्वभाव से, अपने-आपसे, उन परमेश्वर ‘अच्युत’ को हम नमस्कार करते हैं । अच्युतं केशवं रामनारायणं… ।
‘ॐ अच्युताय नमः’ मंत्र की गुरुवार से गुरुवार २ सप्ताह या ४ सप्ताह तक ११ मालाएँ रोज जप करे । कुछ ही दिनों में यह मंत्र सिद्ध ह जायेगा। फिर जो काम-धंधा या नौकरी करता है वह जल में देखते हुए २१ बार जप करे और दायाँ नथुना बंद करके बायाँ स्वर चलाकर वह जल पिये । इससे रोजी-रोटी में बरकत होती है और दरिद्रता मिटती है ।
 श्रद्धा से करके देख लें । आजमायेगा तो श्रद्धा नहीं रहेगी । श्रद्धा से करेगा तो दरिद्रता नहीं रहेगी ।

नारी कल्याण पाक

यह पाक युवतियों, गर्भिणी, नवप्रसूता माताएँ तथा महिलाएँ – सभी के लिए लाभदायी है ।*
लाभ : यह बल व रक्तवर्धक, प्रजनन – अंगों को सशक्त बनानेवाला, गर्भपोषक, गर्भस्थापक (गर्भ को स्थिर – पुष्ट करनेवाला), श्रमहारक (श्रम से होनेवाली थकावट को मिटानेवाला) व उत्तम पित्तनाशक है । एक – दो माह तक इसका सेवन करने से श्वेतप्रदर (ल्यूकोरिया, अत्यधिक मासिक रक्तस्राव व उसके कारण होनेवाले कमरदर्द, रक्त की कमी, कमजोरी, निस्तेजता आदि दूर होकर शक्ति व स्फूर्ति आती है । जिन माताओं को बार-बार गर्भपात होता हो उनके लिए यह विशेष हितकर है । सगर्भावस्था में छठे महिने से पाक का सेवन शुरू करने से बालक हृष्ट-पुष्ट होता है, दूध भी खुलकर आता है ।
धातु की दुर्बलता में पुरुष भी इसका उपयोग कर सकते हैं ।
सामग्री : सिंघाड़े का आटा, गेंहू का आटा व देशी घी प्रत्येक २५० ग्राम, खजूर १०० ग्राम, बबूल का पिसा हुआ गोंद १०० ग्राम, पिसी मिश्री ५०० ग्राम ।
विधि : घी को गर्म कर गोंद को घी में भून लें । फिर उसमें सिंघाड़े व गेंहू का आटा मिलाकर धीमी आँच पर सेंकें । जब मंद सुगंध आने लगे तब पिसा हुआ खजूर व मिश्री मिला दें । पाक बनने पर थाली में फैलाकर छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर रखें ।
सेवन-विधि : २ टुकड़े ( लगभग २० ग्राम ) सुबह शाम खायें । ऊपर से दूध पी सकते हैं ।
सावधानी : खट्टे, मिर्च-मसालेदार व तेल में तले हुए तथा ब्रेड-बिस्कुट आदि बासी पदार्थ न खायें ।

 शनिवार के दिन विशेष प्रयोग 

 शनिवार के दिन पीपल के वृक्ष का दोनों हाथों से स्पर्श करते हुए ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का 108 बार जप करने से दुःख, कठिनाई एवं ग्रहदोषों का प्रभाव शांत हो जाता है ।
 हर शनिवार को पीपल की जड़ में जल चढ़ाने और दीपक जलाने से अनेक प्रकार के कष्टों का निवारण होता है । (पद्म पुराण)

आर्थिक कष्ट निवारण हेतु

एक लोटे में जल, दूध, गुड़ और काले तिल मिलाकर हर शनिवार को पीपल के मूल में चढ़ाने तथा ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र जपते हुए पीपल की ७ बार परिक्रमा करने से आर्थिक कष्ट दूर होता है ।

Accherishtey

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