धर्म

आज का हिन्दू पंचांग 22 सितम्बर: चंद्रमा करेगा सिंह राशि में प्रवेश, जानें शुभ मुहूर्त

आज का हिन्दू पंचांग 22 सितम्बर: राहुकाल और शुभमुहूर्त के साथ जानें कैसे लगेगा कार्यस्थल पर मन और उन्नतिकारक कुंजियाँ

दिनांक – 22 सितम्बर 2022

दिन – गुरुवार

विक्रम संवत् – 2079

शक संवत् – 1944

अयन – दक्षिणायन

ऋतु – शरद

मास – आश्विन (गुजरात एवं महाराष्ट्र में भाद्रपद)

पक्ष – कृष्ण

तिथि – द्वादशी रात्रि 01:17 तक तत्पश्चात त्रयोदशी

नक्षत्र – अश्लेषा रात्रि 02:03 तक तत्पश्चात मघा

योग – शिव सुबह 09:45 तक तत्पश्चात सिद्ध

राहु काल – दोपहर 02:03 से 03:34 तक

सूर्योदय – 06:28

सूर्यास्त – 06:36

दिशा शूल – दक्षिण दिशा में

ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 04:53 से 05:41 तक

निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:09 से 12:56 तक

व्रत पर्व विवरण – द्वादशी का श्राद्ध

विशेष – द्वादशी को पूतिका (पोई) खाने से पुत्र का नाश होता है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)

जैविक घड़ी पर आधारित दिनचर्या

प्रातः ३ से ५ – (जीवनी शक्ति विशेषरूप से फेफडों में होती है)
थोड़ा गुनगुना पानी पीकर खुली हवा में घूमना एवं प्राणायाम करना । शरीर स्वस्थ व स्फूर्तिमान होता है । ब्राह्ममुहूर्त में उठनेवाले लोग बुद्धिमान व उत्साही होते हैं और सोते रहनेवालों का जीवन निस्तेज हो जाता है ।

प्रातः ५ से ७ – (बड़ी आँत में)

प्रातः जागरण से लेकर सुबह ७ बजे के बीच मल-त्याग एवं स्नान कर लेना चाहिए । सुबह ७ बजे के बाद जो मल-त्याग करते हैं उन्हें अनेक बीमारियाँ होती हैं ।

सुबह ७ से ९ – (अमाशय यानी जठर में)
*इस समय (भोजन के २ घंटे पूर्व) दूध अथवा फलों का रस या कोई पेय पदार्थ ले सकते हैं ।

९ से ११ – (अग्न्याशय व प्लीहा में)
*यह समय भोजन के लिए उपयुक्त है । भोजन के बीच-बीच में गुनगुना पानी (अनुकूलता अनुसार) घूँट-घूँट पियें ।

दोपहर ११ से १ – (हृदय में)
दोपहर १२ बजे के आसपास मध्याङ्घ-संध्या करने का हमारी संस्कृति में विधान है । भोजन वर्जित ।

दोपहर १ से ३ – (छोटी आँत में)
भोजन के करीब २ घंटे बाद प्यास-अनुरूप पानी पीना चाहिए । इस समय भोजन करने अथवा सोने से पोषक आहार-रस के शोषण में अवरोध उत्पन्न होता है व शरीर रोगी तथा दुर्बल हो जाता है ।

दोप. ३ से ५ – (मूत्राशय में)
२-४ घंटे पहले पिये पानी से इस समय मूत्र-त्याग की प्रवृत्ति होगी ।

शाम ५ से ७ – (गुर्दे में)
इस समय हलका भोजन कर लेना चाहिए । सूर्यास्त के १० मिनट पहले से १० मिनट बाद तक (संध्याकाल में) भोजन न करें । शाम को भोजन के तीन घंटे बाद दूध पी सकते हैं ।

रात्रि ७ से ९ – (मस्तिष्क में)
*इस समय मस्तिष्क विशेष रूप से सक्रिय रहता है । अतः प्रातःकाल के अलावा इस काल में पढ़ा हुआ पाठ जल्दी याद रह जाता है ।

रात्रि ९ से ११ – (रीढ़ की हड्डी में स्थित मेरुरज्जू में
*इस समय की नींद सर्वाधिक विश्रांति प्रदान करती है । इस समय का जागरण शरीर व बुद्धि को थका देता है ।

रात्रि ११ से १ – (पित्ताशय में)
*इस समय का जागरण पित्त-विकार, अनिद्रा, नेत्ररोग उत्पन्न करता है व बुढ़ापा जल्दी लाता है । इस समय नई कोशिकाएँ बनती हैं ।

१ से ३ – (यकृत में
इस समय का जागरण यकृत (लीवर) व पाचन तंत्र को बिगाड़ देता है ।

ऋषियों व आयुर्वेदाचार्यों ने बिना भूख लगे भोजन करना वर्जित बताया है । अतः प्रातः एवं शाम के भोजन की मात्रा ऐसी रखें, जिससे ऊपर बताये समय में खुलकर भूख लगे ।
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