धर्म

आज का हिन्दू पंचांग 3 सितम्बर: कोई भी कार्य करने से पहले जानें आज का पंचांग

आज का हिन्दू पंचांग 3 सितम्बर: राहुकाल और शुभमुहूर्त के साथ जानें कैसे लगेगा कार्यस्थल पर मन और उन्नतिकारक कुंजियाँ

दिनांक – 03 सितम्बर 2022
दिन – शनिवार
विक्रम संवत् – 2079
शक संवत् – 1944
अयन – दक्षिणायन
ऋतु – शरद
मास – भाद्रपद
पक्ष – शुक्ल
तिथि – सप्तमी दोपहर 12:28 तक तत्पश्चात अष्टमी
नक्षत्र – अनुराधा रात्रि 10:57 तक तत्पश्चात ज्येष्ठा
योग – वैधृति शाम 05:00 तक तत्पश्चात विष्कम्भ
राहु काल – सुबह 09:31 से 11:05 तक
सूर्योदय – 06:22
सूर्यास्त – 06:55
दिशा शूल – पूर्व दिशा में
ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 04:51 से 05:37 तक
निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:16 से 01:02 तक
व्रत पर्व विवरण –
 विशेष – सप्तमी को ताड़ का फल खाने से रोग बढ़ता है तथा शरीर का नाश होता है । अष्टमी को नारियल का फल खाने से बुद्धि का नाश होता है ।

अति नींद और सुस्ती आती हो तो…

 पढ़ते समय नींद आती हो और सिर दुखता हो तो पान में एक लौंग डालकर चबा लेना चाहिए । इससे सुस्ती और सिरदर्द में कमी होगी तथा नींद अधिक नहीं सतायेगी ।

 शनिवार के दिन विशेष प्रयोग 

 शनिवार के दिन पीपल के वृक्ष का दोनों हाथों से स्पर्श करते हुए ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का 108 बार जप करने से दुःख, कठिनाई एवं ग्रहदोषों का प्रभाव शांत हो जाता है । (ब्रह्म पुराण)
 हर शनिवार को पीपल की जड़ में जल चढ़ाने और दीपक जलाने से अनेक प्रकार के कष्टों का निवारण होता है । (पद्म पुराण)

आर्थिक कष्ट निवारण हेतु

एक लोटे में जल, दूध, गुड़ और काले तिल मिलाकर हर शनिवार को पीपल के मूल में चढ़ाने तथा ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र जपते हुए पीपल की ७ बार परिक्रमा करने से आर्थिक कष्ट दूर होता है ।

अशुभ क्या है ? (भाग-१)

  1.  बिल्ली की धूलि शुभ प्रारब्ध का हरण करती है । (नारद पुराण, पूर्व भाग : 26.32)
  2.  कुत्ता रखने वालों के लिए स्वर्गलोक में स्थान नहीं है । उनका पुण्य क्रोधवश नामक राक्षस हर लेते हैं । (महाभारत, महाप्रयाण पर्व : 3.10)
  3.  ‘महाभारत’ में यह भी आया है कि ‘घर में टूटा-फूटा बर्तन, सामान (फर्नीचर), मुर्गा, कुत्ता, बिल्ली होना अच्छा नहीं है । ये शुभ गुणों को हरते हैं ।
  4.  दूसरे का अन्न, दूसरे का वस्त्र, दूसरे का धन, दूसरे की शय्या, दूसरे की गाड़ी, दूसरे की स्त्री का सेवन और दूसरे के घर में वास – ये इन्द्र के भी ऐश्वर्य को नष्ट कर देते हैं । (शंखलिखित स्मृति : 17)
जिस तरह शरीर में जीवन न हो तो वह मुर्दा शरीर अशुभ माना जाता है । इसी तरह खाली कलश भी अशुभ है । दूध, घी, पानी अथवा अनाज से भरा हुआ कलश कल्याणकारी माना जाता है । भरा हुआ घड़ा मांगलिकता का प्रतीक है ।

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