धर्म

आज का पंचांग 16 दिसम्बर: शुरू हो गया खरमास, 30 दिनों तक नहीं होंगे शुभ कार्य

आज का हिन्दू पंचांग 16 दिसम्बर: राहुकाल और शुभमुहूर्त के साथ जानें कैसे लगेगा कार्यस्थल पर मन और उन्नतिकारक कुंजियाँ

दिनांक – 16 दिसम्बर 2022

दिन – शुक्रवार

विक्रम संवत् – 2079

शक संवत् – 1944

अयन – दक्षिणायन

ऋतु – हेमंत

मास – पौष (गुजरात, महाराष्ट्र में मार्गशीर्ष)

पक्ष – कृष्ण

तिथि – अष्टमी 17 दिसम्बर प्रातः 03:02 तक तत्पश्चात नवमी

नक्षत्र – पूर्वाफाल्गुनी सुबह 07:35 तक तत्पश्चात उत्तराफाल्गुनी

योग – प्रीति सुबह 07:47 तक तत्पश्चात आयुष्मान

राहु काल – सुबह 11:15 से 12:35 तक

सूर्योदय – 07:13

सूर्यास्त – 05:57

दिशा शूल – पश्चिम दिशा में

ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 05:27 से 06:20 तक

निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:09 से 01:02 तक

व्रत पर्व विवरण – षडशीति संक्रांति, धनु संक्रांति

विशेष – अष्टमी को नारियल का फल खाने से बुद्धि का नाश होता है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)

षडशीति संक्रांति – 16 दिसम्बर 2022

पुण्यकाल – सुबह 09:59 से शाम 04:23 तक ।

षडशीति संक्रांति में किये गए जप, ध्यान आदि पुण्य कर्म का फल 86000 गुना होता है – (पद्म पुराण )

घर में सुख-सम्पदा व बरकत का अचूक उपाय

सुबह जब घर में भोजन बने तो सबसे पहलेवाली रोटी अन्य रोटियों से थोड़ी बड़ी बनायें और इसे अलग निकाल लें । इस रोटी के चार बराबर टुकड़े कर लें और इन चारों पर कुछ मीठा जैसे – खीर, गुड़ या शक्कर रख दें ।

सबसे पहले एक टुकड़ा गाय को खिला दें और भगवान से प्रार्थना करें । धर्मग्रंथों के अनुसार गाय में सभी देवताओं का निवास होता है इसलिए सबसे पहले रोटी गाय को ही दी जाती हैं ।

फिर दूसरा टुकड़ा कुत्ते को खिला दें । ’शिवपुराण’ के अनुसार ‘कुत्ते को रोटी खिलाते समय बोलना चाहिए कि ‘यमराज के मार्ग का अनुसरण करनेवाले जो श्याम और शबल नाम के दो कुत्ते हैं, मैं उनके लिए यह अन्न का भाग देता हूँ । वे इस भोजन को ग्रहण करें ।’ इस श्वानबलि कहते हैं |’

रोटी के तीसरे भाग को कौओं को खिला दें और बोलें : ‘पश्चिम, वायव्य, दक्षिण और नैऋत्य दिशा में रहनेवाले जो पुण्यकर्मा कौए हैं, वे मेरे इस दिये हुए भोजन को ग्रहण करें ।’ इसे काकबलि कहते हैं ।

अब रोटी का अंतिम टुकड़ा एवं कुछ अन्न घर पर आये किसी भिक्षु को दे दें ।

यह छोटा-सा उपाय रोज करने से आपको औदार्य सुख (उदारता का सुख) मिलेगा और आपकी किस्मत कुछ ही दिनों में बदल जायेगी ।

अनेक रोगों की एक दवा

तुलसी के 25-30 पत्ते लेकर खरल में अथवा सिलबट्टे पर पीसें, जिस पर कोई मसाला न पीसा गया हो। इस पिसे हुए तुलसी के गूदे में 5-10 ग्राम मीठा दही मिलाकर अथवा 5-7 ग्राम शहद मिलाकर 30-40 दिन सेवन करने से गठिया का दर्द, सर्दी, जुकाम, खांसी (यदि रोग पुराना हो तो भी), गुर्दे (किडनी) की पथरी, सफेद दाग या कोढ़, शरीर का मोटापा, वृद्धावस्था की दुर्बलता, पेचिश, अम्लता, मन्दाग्नि, कब्ज, गैस, दिमागी कमजोरी, स्मरणशक्ति का अभाव, पुराने से पुराना सिरदर्द, बुखार, रक्तचाप (उच्च या निम्न) हृदयरोग, शरीर की झुर्रियाँ, श्वासरोग, कैंसर आदि रोग दूर हो जाते हैं ।

कैंसर जैसे कष्टप्रद रोग में इस दवा को दो या तीन बार सेवन कर सकते हैं ।
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