Aaj Ka Panchang 26 January 2023, रविवार : आज बसंत पंचमी, जानें शुभ मुहूर्त कब से कब तक

आज माघ मास की पंचमी तिथि है और इस तिथि को बंसत पंचमी या फिर श्रीपंचमी के नाम से जाना जाता है। इस शुभ दिन पर सिद्ध योग, शिव योग, रवि योग और सर्वाद्धि सिद्ध योग बन रहा है।

आज का हिन्दू पंचांग 

दिनांक – 26 जनवरी 2023
दिन – गुरुवार
विक्रम संवत् – 2079
शक संवत् – 1944
अयन – उत्तरायण
ऋतु – शिशिर
मास – माघ
पक्ष – शुक्ल
तिथि – पंचमी सुबह 10:28 तक तत्पश्चात षष्ठी
नक्षत्र – उत्तर भाद्रपद शाम 06:57 तक तत्पश्चात रेवती
योग – शिव दोपहर 03:29 तक तत्पश्चात सिद्ध
राहु काल – दोपहर 02:15 से 03:38 तक
सूर्योदय – 07:22
सूर्यास्त – 06:23
दिशा शूल – दक्षिण दिशा में
ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 05:38 से 06:30 तक
निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:26 से 01:18 तक
व्रत पर्व विवरण – वसंत पंचमी, श्री पंचमी, 74 वाँ गणतंत्र दिवस
विशेष – पंचमी को बेल खाने से कलंक लगता है । षष्ठी को नीम की पत्ती, फल या दातुन मुँह में डालने से नीच योनियों की प्राप्ति होती है ।
(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)

 वसंत पंचमी – 26 जनवरी 2026

माघ शुक्ल पंचमी अर्थात वसंत पंचमी को माँ सरस्वती का आविर्भाव-दिवस माना जाता है। इस दिन प्रातः सरस्वती-पूजन करना चाहिए । पुस्तक, लेखनी (कलम) में भी देवी सरस्वती का निवासस्थान माना जाता है, अतः उनकी भी पूजा की जाती है ।

वसंत पंचमी माँ सरस्वती का प्रागट्य दिवस है । सारस्वत्य मंत्र लिए हुए जो भी साधक हैं , सरस्वती माँ का पूजन करें और सफेद गाय का दूध मिले अथवा गाय के दूध की खीर बनाकर सरस्वती माँ को भोग लगायें । सफेद पुष्पों से पूजन करें और जिन विद्यार्थियों ने सारस्वत्य मंत्र लिया है वे तो खास जीभ तालू पर लगाकर सारस्वत्य मंत्र का जप इस दिन करें तो वे प्रतिभासम्पन्न आसानी से हो जायेंगे ।

वसंत पंचमी सरस्वती माँ का आविर्भाव का दिवस है । जो भी पढ़ते हों और शास्त्र आदि या जो भी ग्रन्थ, उनका आदर-सत्कार-पूजन करो । और भ्रूमध्य में सूर्यदेव का ध्यान करो । जिससे पढ़ाई-लिखाई में आगे बढ़ोगे ।
पूज्य बापूजी – Jan’09 Delhi

गुरुवार विशेष 

हर गुरुवार को तुलसी के पौधे में शुद्ध कच्चा दूध गाय का थोड़ा-सा ही डाले तो, उस घर में लक्ष्मी स्थायी होती है और गुरूवार को व्रत उपवास करके गुरु की पूजा करने वाले के दिल में गुरु की भक्ति स्थायी हो जाती है ।

गुरुवार के दिन देवगुरु बृहस्पति के प्रतीक आम के पेड़ की निम्न प्रकार से पूजा करें :

एक लोटा जल लेकर उसमें चने की दाल, गुड़, कुमकुम, हल्दी व चावल डालकर निम्नलिखित मंत्र बोलते हुए आम के पेड़ की जड़ में चढ़ाएं ।

ॐ ऐं क्लीं बृहस्पतये नमः ।

फिर उपरोक्त मंत्र बोलते हुए आम के वृक्ष की पांच परिक्रमा करें और गुरुभक्ति, गुरुप्रीति बढ़े ऐसी प्रार्थना करें । थोड़ा सा गुड़ या बेसन की मिठाई चींटियों को डाल दें ।

( लोक कल्याण सेतु , अंक – ११६ )

गिलोय के उपयोग :

गिलोय के रस पीने से मलेरिया तथा पुराना बुखार दूर होता है ।

चुटकी भर दालचीनी व लौंग के साथ लेने से मुद्दती बुखार दूर होता है ।

बुखार के बाद रहने रहनेवाली कमजोरी में गिलोय का रस पौष्टिक एवं शक्तिप्रदायक है ।

2 से 3 ग्राम अधकुटी सोंठ व 25 से 30 ग्राम कूटी हुई ताजी गिलोय का काढ़ा बनाकर पीने से संधिवात तथा आमवात दूर हता है ।

गिलोय के रस में मिश्री मिलाकर पिने से पीलिया में लाभ होता है ।

गिलोय का रस दीर्घकाल तक लेते रहने से कायमी कब्जी के रोगी को लाभ होता है ।

गिलोय के चूर्ण अथवा रस का नियमित उपयोग डायबिटीजवालों के लिए लाभदायी है । हररोज इंजेक्शन तथा टिकियों कि आवश्यकता नहीं पड़ेगी । उनके कुप्रभावों से रोगी बच जायेगा ।

माता को गिलोय का चूर्ण अथवा रस देने से दूध बढ़ता है व दूध के दोष दूर होते है । माता के दूषित दूध के कारण होनेवाले रोगों से बालक कि रक्षा होती है ।

गिलोय उत्कृष्ट मेध्य अर्थात बुद्धिवर्धक रसायन है । इसके नियमित सेवन से दीर्घायुष्य, चिरयौवन व कुशाग्र बुद्धि कि प्राप्ति होती है ।

चूर्ण की मात्रा : 2 से 3 ग्राम । रस की मात्रा : 20 से 30 मि.लि.

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