Vastu Tips: इन जगहों पर मंदिर है तो बदल दें जगह! जानें क्या कहता है वास्तु

घर में पूजा-पाठ के लिए मंदिर का स्थान बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। वास्तु शास्त्र में पूजा घर की दिशा और उसके आसपास की जगह को लेकर कई ....

घर में पूजा-पाठ के लिए मंदिर का स्थान बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। वास्तु शास्त्र में पूजा घर की दिशा और उसके आसपास की जगह को लेकर कई मान्यताएं बताई गई हैं। माना जाता है कि मंदिर को सही स्थान पर रखने से घर का वातावरण सकारात्मक बना रहता है। वहीं, कुछ ऐसी जगहें भी हैं जहां पूजा घर बनाना वास्तु के अनुसार उचित नहीं माना जाता।

अगर आप भी घर में मंदिर बनाने या पूजा की जगह बदलने की सोच रहे हैं, तो इन बातों का ध्यान रख सकते हैं।

1. बेडरूम में मंदिर बनाने से बचें

कई घरों में जगह कम होने की वजह से लोग बेडरूम में ही पूजा का स्थान बना लेते हैं। हालांकि, वास्तु मान्यताओं के मुताबिक पूजा घर के लिए बेडरूम को उपयुक्त स्थान नहीं माना जाता।बेडरूम मुख्य रूप से आराम और निजी जीवन से जुड़ा स्थान होता है। इसलिए वास्तु के अनुसार कोशिश करनी चाहिए कि पूजा के लिए घर में अलग और शांत जगह निर्धारित की जाए।

2. सीढ़ियों के नीचे न बनाएं पूजा घर

सीढ़ियों के नीचे की जगह को भी पूजा मंदिर के लिए सही नहीं माना जाता। वास्तु मान्यताओं के अनुसार इस हिस्से में पूजा स्थल बनाने से सकारात्मक ऊर्जा प्रभावित हो सकती है। इसी वजह से घर में मंदिर के लिए सीढ़ियों के नीचे की जगह का इस्तेमाल करने से बचने की सलाह दी जाती है।

3. बाथरूम के आसपास मंदिर रखने से बचें

पूजा स्थल को साफ-सुथरा और शांत स्थान माना जाता है। वास्तु के अनुसार मंदिर को बाथरूम के बिल्कुल पास बनाना उचित नहीं माना जाता। ऐसा माना जाता है कि पूजा घर और बाथरूम के बीच पर्याप्त दूरी होनी चाहिए। इसलिए मंदिर के लिए ऐसी जगह चुनना बेहतर माना जाता है जहां साफ-सफाई और पवित्रता का विशेष ध्यान रखा जा सके।

4. दक्षिण-पश्चिम दिशा में मंदिर न बनाएं

वास्तु शास्त्र में घर की उत्तर-पूर्व दिशा यानी ईशान कोण को पूजा घर के लिए विशेष रूप से शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिशा में पूजा स्थल होने से घर में सकारात्मक वातावरण बना रहता है। इसके विपरीत दक्षिण-पश्चिम दिशा में मंदिर बनाना वास्तु के लिहाज से उचित नहीं माना जाता। इसलिए पूजा घर की जगह तय करते समय दिशा का भी ध्यान रखने की सलाह दी जाती है।

5. किचन में मंदिर बनाने से बचें

कुछ घरों में जगह की कमी के कारण रसोई के अंदर ही पूजा का स्थान बना दिया जाता है। हालांकि, वास्तु और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार किचन को मंदिर के लिए आदर्श स्थान नहीं माना जाता। रसोई में खाना बनाने और अलग-अलग घरेलू गतिविधियों के कारण मंदिर के लिए अलग स्थान रखना बेहतर माना जाता है। अगर संभव हो तो पूजा घर को किचन से अलग रखने की कोशिश करनी चाहिए।

मंदिर के लिए कैसी जगह चुनें?

वास्तु मान्यताओं के अनुसार पूजा घर के लिए घर की **उत्तर-पूर्व दिशा यानी ईशान कोण** को प्राथमिकता दी जा सकती है। मंदिर ऐसी जगह होना चाहिए जहां पर्याप्त साफ-सफाई रहे और पूजा के दौरान शांत वातावरण मिल सके। अगर आपके घर में मंदिर ऊपर बताई गई जगहों में से किसी स्थान पर है, तो वास्तु संबंधी मान्यताओं को ध्यान में रखते हुए उसकी जगह बदलने पर विचार किया जा सकता है।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी वास्तु शास्त्र, धार्मिक मान्यताओं और पारंपरिक धारणाओं पर आधारित है। इन दावों का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इसे धार्मिक विश्वास के रूप में ही लिया जाना चाहिए।

Tez Tarrar News

Gagandeep Singh

गगनदीप सिंह तेज़ तर्रार न्यूज़ चैनल में बतौर कंटेंट राइटर कार्य कर रहे है। जहां ये दिल्ली से जुड़ी सारी क्राइम की खबरें निडर होकर अपने लेख से लोगों तक… More »
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