विश्व

COP28 : योजनाओं में 130 देश खाद्य और कृषि को प्राथमिकता देने पर सहमत

2050 तक नेट जीरो उत्सर्जन के लिए 20 से अधिक देशों ने विश्व परमाणु ऊर्जा क्षमता को तीन गुना करने का किया आह्वान

कोप 28, जो कि दुबई में आयोजित हो रहा है, एक महत्वपूर्ण जलवायु सम्मेलन है जिसमें विभिन्न देशों ने वार्ता की है ताकि ग्लोबल वार्मिंग और पर्यावरणीय मुद्दों पर ध्यान दिया जा सके। यहां पर भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ग्लोबल साउथ की चिंताओं को उठाते हुए विकासशील देशों के साथ जलवायु वित्त के लिए विशेष रूप से प्रतिबद्धता को बढ़ाने की बात की।

 

सम्मेलन के दौरान, जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए कई महत्त्वपूर्ण उपायों पर चर्चा हुई है। यहां पर विशेष रूप से जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न स्वास्थ्य संबंधित चुनौतियों को ध्यान में रखकर WHO के महानिदेशक ने भी इस पर बात की।

 

विश्व नेताओं ने 2050 तक नेट जीरो उत्सर्जन की दिशा में कदम बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई है। इसके लिए नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए प्रयास किया जा रहा है ताकि ऊर्जा सुरक्षा में सुधार हो सके।

 

WHO के महानिदेशक ने जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न स्वास्थ्य संकेतकों के बारे में गंभीर चिंता जताई है और स्वास्थ्य संबंधित चुनौतियों को लेकर जोर दिया है।

 

इस सम्मेलन में, नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए कई उपायों पर चर्चा की गई है ताकि जलवायु परिवर्तन के प्रत्यक्ष प्रभावों को कम किया जा सके।

 

जलवायु परिवर्तन के बढ़ते हुए प्रभावों को ध्यान में रखते हुए, संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन ने स्वास्थ्य संबंधित मुद्दों को भी महत्त्वपूर्ण माना है।

 

WHO के महानिदेशक ने संयुक्त राष्ट्र से कहा है कि जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न स्वास्थ्य संकेतकों को ध्यान में रखते हुए जलवायु परिवर्तन को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

 

यहां आपके दिये गए पाठ को पैराफ्रेज़ करके अधिक सुलझाया जा सकता है ताकि इसको अधिक समझने में मदद मिल सके।

 

प्रधानमंत्री मोदी ने सीओपी-28 प्रेसीडेंसी सत्र में अपने संबोधन में विकासशील देशों को जलवायु महत्वाकांक्षाओं के लिए संशोधित निधियों की आवश्यकता पर बात की।

 

उन्होंने वित्तीय संरचनाओं, हरित निधियों एवं अनुकूलन निधियों में सुधार के लिए सक्रियता की अपील की।

 

मोदी जी ने ‘ग्रीन क्रेडिट इनिशिएटिव’ को शुक्रवार को COP28 में लॉन्च किया, जो पर्यावरण-मित्रता को बढ़ावा देने का काम करेगा।

 

उन्होंने दी गई घोषणा का स्वागत किया और यूएई ने जलवायु निवेश कोष में निवेश करने की घोषणा की।

 

सीओपी-28 में कम आय वाले देशों के लिए ऋण और निवेश संबंधित मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ। इसके अलावा, हरित प्रौद्योगिकी निवेश को बढ़ाने और कार्बन मूल्य निर्धारण में सुधारों पर बातचीत हुई।

 

साथ ही, अंतर्राष्ट्रीय जलवायु वित्त में सुधार और पेरिस समझौते के साथ तालमेल पर भी बातचीत हुई। इस उपरांत, खाद्य प्रणालियों को लेकर भी चर्चा हुई, जो ग्रीनहाउस गैसों के लिए जिम्मेदार मानी जाती हैं।

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